Wednesday, 23 October 2019

The immortal message

27 Sep 1973 - Swami Raganathananda – R K Mission, Secunderabad – I am glad to visit this magnificent Vivekananda Rock Memorial with Sri Eknath Ranade again. I was here last on 16 September 1970 when Prime Minister Smt Indira Gandhi visited this & we addressed the large public meeting on the main land later. This memorial is found to educate our people in the vast possibilities of the modern age of Indian history as envisaged by Swami Vivekananda, namely, a purer & more dynamic spiritual life of the whole people, removal of poverty & social injustices, high level of ethical & moral life, & solid contributions towards international peace & the spiritual uplift of modern humanity everywhere.

27 Sep 1975 - Shree Ashok Singhal ji - जो मानसिक शांति स्वामी विवेकानन्द को यहाँ प्राप्त हुई वह आज भी विद्यमान है उसे प्राप्त करने के लिए प्रत्येक भारतीय को यहाँ अवश्य आना चाहिए |यह मातृभूमि जो हम सब की सामान रूप से अधिष्ठानशक्ति और इष्ट देवी है उसका परम स्थान उनके चरणों में यहाँ सदा से विद्यमान है इसका ही बल राष्ट्र को बलशाली और कार्यशील तथा सात्विक शक्ति सम्पन्न बनाएगा | इसकी सामूहिक आराधना में हम सब लगे यही यहाँ का वह संदेश है |

27 Sep 2001 - Shree Satish Chandra, Secretary, National Security Council - A magnificent monument to one of the greatest souls of India. Extremely well maintained and a source of inspiration to all visitors. I was particularly impressed by the meditation Hall.

28 Sep 1976 – Sri B C Basah – Judge, High Court Kolkata - We have very much appreciated the manner in which the V.R.M.C. has been maintaining the upkeep of the rock . One cannot but let feeling the majesty of this nation but the simplicity of its spiritual leadership. Though this may be land's end , but I am sure this will be beginning of many. May Ramkrishana , Sarda Ma & Swamiji bless us.  

29 Sep 1970 – Sri Narsingh Baitha - Minister of State for Irrigation and Power - आज मुझे स्वामी विवेकानन्द स्मारक का दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ| यह स्मारक दुनियाँ के स्मारकों में एक है  इसकी तुलना नहीं की जा सकती|पूज्य स्वामीजी अपने जीवन में सदा इसी प्रयास में रहे कि हिंदुस्तान के सभी वर्ग के लोग एक हो और शांतिमय तरीके से तरक्की करते रहे| उन्होंने विश्व के मानव को एक सूत्र में बाँधने का प्रयास किया और हिन्दू जाति जो बिखर रही थी उसे फिर से एक सूत्र में बंधा| आज उन्ही के बताये मार्ग पर चल कर हम तरक्की करते जा रहे है और आगे भी निश्चित भारत स्वामीजी के बताये मार्ग पर चलकर तरक्की करता रहेगा| माँ का दर्शन करने से बड़ी प्रसन्नता हुई| दक्खिन और उत्तर भारत को एकता की सूत्र में बाँधने वाला स्मारक और मजबूती से  बांधेगा |

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