Saturday, 18 March 2017

Prime Minister speaks -3

भाइयों बहनों, एकनाथजी भी हमेशा चाहते थे कि देश की spiritual power को जगाकर देश की कर्मशक्ति  या working power को constructive कार्यों में लगाया जाए। आज जब विवेकानंद केंद्र में हनुमान जी की मूर्ति की स्थापना हो रही है, तो उनके इस कथन की inspiration का भी पता चलता है।

हनुमान जी यानी सेवा, हनुमान जी यानी समर्पण भक्ति का वो रूप था। जिसमें सेवा ही परम धर्म बन गया था। जब वो समुद्र को पार कर रहे थे तो मैनाक पर्वत उन्हें बीच में विश्राम देना चाहता था। लेकिन संकल्प सिद्धि से पहले हनुमान जी के लिए शिथिलता की कोई गुंजाइश नहीं थी। अपने लक्ष्य की प्राप्ति तक उन्होंने आराम नहीं किया।

हनुमान जी के सेवाभाव पर भारत रत्न सी राजगोपालाचारी जी ने भी अपनी रामायण में लिखा है। जब हनुमानजी सीता माता से मिलकर वापस लौटते हैं, भगवान राम जी को माता के सकुशल होने की बात बताते हैं, तो राम जी कहते हैं-

"The deed done by Hanumaan none else in the world could even conceive of attempting-crossing the sea, entering Lanka protected by Raavana and his formidable hosts and accomplishing the task set him by his king not only fully but beyond the fondest hopes of all."

राज जी  कहा है कि हनुमान जी ने वो काम किया था, जिसकी कोई उम्मीद तक नहीं कर रहा था। कठिनाइयों के जिस समंदर को हनुमान जी ने पार किया था, वो कोई सोच भी नहीं सकता था।

और इसलिये भाइयों बहनों, हम भी जब सबका साथ सबका विकास ये Guiding Principal पर चल रहे हैं। चाहे गरीब से गरीब व्यक्ति के लिये जनधन योजना के जरिये गरीबों को बैंकिंग व्यवस्था के साथ जोड़ा जाए आज गरीब के पास एक व्यवस्था कर के हमने आगे बढ़ने का प्रयास किया था। और इसलिये बीमा कराने का विकल्प है। किसानों को इसका लाभ मिला है। किसानों को सबसे कम प्रीमियम पर फसल बीमा योजना दी गई है। बेटियों को बचाने के लिए उन्हें पढ़ाने के लिये अभियान चला रहे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ। गर्भवती महिलाओं को आर्थिक मदद के लिये देशव्यापी योजना बनाई गई है। 5 करोड़ परिवार जो लकड़ी का चूल्हा जलाकर माताएं खाना पकाती थीं। और एक दिन में चार सौ सिगरेट का धुंआ खाना पकाने से लड़की के चूल्हे से उस मां के शरीर में जाता था। उन माताओं को अच्छा स्वास्थ्य मिले। प्राथमिक सुविधा मिले। 5 करोड़ परिवारों में gas connection का बीड़ा उठाया और डेढ़ करोड़ दे चुके हैं।

दलित, पीड़ित, वंचित की सेवा यही तो जन सेवा प्रभु सेवा का मंत्र देती है। हमारे देश के दलित नौजवानों को stand-up india, start-up india के जरिए empower किया जा रहा है। छोटे कारोबारियों को कम ब्याज पर कर्ज मिल सके, इसलिए मुद्रा योजना चलाई गई है। गरीब की गरीबी तभी दूर होगी जब उसे empower किया जाए। जब गरीब सशक्त होगा, तो स्वयं गरीबी को प्रास्त करके रहेगा। और गरीबी से मुक्ति का वो आनन्द लेगा और एक नई ताकत के साथ वो आगे बढ़ेगा।

रामायण में जब भगवान राम और भरत के बीच शासन को लेकर संवाद हो रहा था तब भगवान राम ने भरत से कहा था-

कच्चिद् अर्थम् विनिश्चित्य लघु मूलम् महा उदयम् |
क्षिप्रम् आरभसे कर्तुम् न दीर्घयसि राघव ||

यानि- हे भरत, ऐसी योजनाएं लागू करो जिनसे कम से कम व्यय में ज्यादा से ज्यादा लोगों का फायदा हो। रामजी ने भरत से ये भी कहा कि इन योजनाओं को लागू करने में बिल्कुल भी देरी ना की जाए।

आयः ते विपुलः कच्चित् कच्चिद् अल्पतरो व्ययः |
अपात्रेषु न ते कच्चित् कोशो गग्च्छति राघव ||

यानि भरत, इस बात का ध्यान रखना की आय ज्यादा हो और खर्च कम। वो इस बात की भी हिदायत देते हैं कि अपात्रों या undeserving को राज्य कोष का फायदा ना मिले।

अपात्रों से सरकारी खजाने को बचाना भी सरकार की कार्यसंस्कृति का हिस्सा है। आपने देखा होगा हमने आधार कार्ड से लिंक करके बैंक अकाउंट में सीधे आर्थिक सहायता ट्रांसफर करना, फर्जी राशनकार्ड वालों को हटाना, फर्जी गैस कनेक्शन वालों को हटाना, फर्जी टीचरों को हटाना, दूसरों का अधिकार छीनने वालों को हटाना, ये सब इस सरकार ने मिशन मोड में लिया है।