Sunday, 22 June 2014

ज्ञान साधरणीकरण पर आधारित होता है



    कोई ज्ञान प्राप्त करने के लिए हम साधारणीकरण की सहायता लेते हैं और साधारणीकरण घटनाओं के पर्यवेक्षण पर आधारित है। हम पहले घटनावली का पर्यवेक्षण करते हैं, फिर उनका साधारणीकरण करते हैं और फिर उनसे अपने सिद्धांत या मतामत निकलते हैं। हम जब तक यह प्रत्यक्ष नहीं कर लेते कि हमारे मन के भीतर क्या हो रहा है और क्या नहीं, तब तक हम अपने मन के सम्बंध में कुछ भी नहीं जान सकते।

बाह्य जगत के व्यापारों का पर्यवेक्षण करना अपेक्षाकृत सम्भव है, क्योंकि उसके लिए हजारों यंत्र निर्मित हो चुके हैं, पर अन्तर्जगत के व्यापार को समझने में मदद करने वाले कोई भी यंत्र नहीं। किन्तु फिर भी हम यह निश्चयपूर्वक जानते है कि किसी विषय का यथार्थ ज्ञान प्राप्त करने के लिए पर्यवेक्षण आवश्यक है। उचित विश्लेषण के बिना विज्ञान निरर्थक और निश्फल होकर केवल भित्तिहीन अनुमान में परिणित हो जाता है। इसी कारण, उन थोडे से मनस्तत्त्वान्वेषियों को छोडकर, जिन्होंने पर्यवेक्षण करने के उपाय जान लिए हैं, शेष सब लोग चिरकाल से परस्पर केवल विवाद ही करते आ रहे हैं।

(I, ३९)


    साधारणीकरण से क्या तात्पर्य है? इसको समझने के लिए हम एक छोटे से उदाहरण का उपयोग कर सकते हैं; जब हम कहते हैं कि कौए काले होते हैं यह साधारणीकरण अनेकों कौओं के रंग, उनकी आदतों और व्यवहार के पर्यवेक्षण पर आधारित है। यही स्थिति किसी अन्य सामान्य ज्ञान की भी है।

राजयोग-विद्या पहले मनुष्य को उसकी अपनी अाभ्यन्तरिक अवस्थाओं के पर्यवेक्षण का इस प्रकार उपाय दिखा देती है। मन ही उस पर्यवेक्षण का यंत्र है। मनोयोग की शक्ति का सही-सही नियमन कर जब उसे अन्तर्जगत् की ओर परिचालित किया जाता है, तभी वह मन का विश्लेषण कर सकती है और तब उसके प्रकाश में हम यह सही-सही समझ सकते हैं कि अपने मन के भीतर क्या घट रहा है। ज्ञान प्राप्त करने का हमारा केवल यही स्त्रोत है।

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मुक्तसंग्ङोऽनहंवादी धृत्युत्साहसमन्वित:।
सिद्ध‌‌यसिद्धयोर्निर्विकार: कर्ता सात्त्विक उच्यते ॥१८.२६॥

Freed from attachment, non-egoistic, endowed with courage and enthusiasm and unperturbed by success or failure, the worker is known as a pure (Sattvika) one. Four outstanding and essential qualities of a worker. - Bhagwad Gita : XVIII-26