Friday, 25 July 2014

सम्पूर्ण स्वाधीनता ही मुक्ति है


            मुक्ति का अर्थ है, सम्पूर्ण स्वाधीनता-शुभ और अशुभ, दोनों प्रकार के बन्धनों से छुटकारा पा जाना। इसे समझना जरा कठिन है। लोहे की जंजीर भी एक जंजीर है, और सोने की जंजीर भी एक जंजीर ही है। यदि हमारी अँगुली में एक काँटा चुभ जाये, तो उसे निकालने के लिए हम दूसरा काँटा काम में लाते हैं, परन्तु जब वह निकल जाता है, तो हम दोनों को ही फेंक देते हैं।

 

      हमें फिर दूसरे काँटे को रखने की आवश्यकता नहीं रह जाती, क्योंकि दोनों आखिर काँटे ही तो हैं। इसी प्रकार कुसंस्कारों का नाश शुभ संस्कार द्वारा करना चाहिए और मन के अशुभ विचारों को शुभ संस्कारों द्वारा दूर करते रहना चाहिए, जब तक कि समस्त अशुभ विचार नष्ट हो जायेँ अथवा पराजित हो जायेँ  या वशीभूत होकर मन में कहीं एक कोने में पडे रह जायेँ। परन्तु उसके उपरान्त शुभ संस्कारों पर भी विजय प्राप्त करना आवश्यक है। तभी जो 'आसक्त' था, वह 'अनासक्त' हो जाता है।

 

      कर्म करो, अवश्य करो, पर उस कर्म अथवा विचार को अपने मन के ऊपर कोई गहरा प्रभाव डालने दो। लहरें आयें और जायें, मांसपेशियों और मस्तिष्क से बडे-बडे कार्य होते रहें, पर वे आत्मा पर किसी प्रकार का गहरा प्रभाव डालने पायें।

(III, ३१)

 

            स्वामीजी ने 'स्वतंत्रता के विचार ' का प्रयोग, पश्चिमी लोगों को मुक्ति अथवा स्तंत्रता के महान् भारतीय आदर्श को समझाने हेतु किया था। उनके लिए यह ज्ञान पूर्णतया नया था कि मुक्ति प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को बुरे और अच्छे दोनों से मुक्त होना पडता है। इसी प्रकार अनासक्त भाव से कर्म करना उनके लिए एक नया अनुभव था। इस प्रकार के अपूर्व विचार, जिनके बारे में पश्चिम ने सुना था अनुभव किया था। उन्हें आसानी से स्वामीजी द्वारा अपने व्यक्तित्व के बल पर प्राप्त अपने सत्य के साथ प्रयोगों और उनकी अभिव्यक्तियों के द्वारा बताये जा सकते थे।


--
कथा : विवेकानन्द केन्द्र { Katha : Vivekananda Kendra }
Vivekananda Rock Memorial & Vivekananda Kendra : http://www.vivekanandakendra.org
Read n Get Articles, Magazines, Books @ http://prakashan.vivekanandakendra.org

Let's work on "Swamiji's Vision - Eknathji's Mission"

Follow Vivekananda Kendra on   blog   twitter   g+   facebook   rss   delicious   youtube   Donate Online

मुक्तसंग्ङोऽनहंवादी धृत्युत्साहसमन्वित:।
सिद्ध‌‌यसिद्धयोर्निर्विकार: कर्ता सात्त्विक उच्यते ॥१८.२६॥

Freed from attachment, non-egoistic, endowed with courage and enthusiasm and unperturbed by success or failure, the worker is known as a pure (Sattvika) one. Four outstanding and essential qualities of a worker. - Bhagwad Gita : XVIII-26

Thursday, 24 July 2014

सच्चा समाजवाद : Vivekananda Kendra News


            मछुआ यदि अपने को आत्मा समझकर चिन्तन करे, तो वह एक उत्तम मछुआ होगा। विद्यार्थी यदि अपने को आत्मा विचारे, तो वह एक श्रेष्ठ विद्यार्थी होगा। वकील यदि अपने को आत्मा समझे, तो वह एक अच्छा वकील होगा। औरों के विषय में भी यही समझो। इसका फल यह होगा कि जातिविभाग अनन्त काल तक रह जायेगा; क्योंकि विभिन्न श्रेणियों में विभक्त होना ही समाज का स्वभाव है। पर रहेगा क्या नहीं? विशेष अधिकारों का अस्तित्व न रह जायेगा।
 - स्वामी विवेकानन्द (V, १४०)

News Updates from Vivekanandakendra.org :

Guru purnima Celebration at Kolkata
Gurupurnima celebration in - Savitri Girls school, Marvari Balika Vidyalaya, Digambar Jain School for Boys and Adi Mahakali Pathsala for Girls. : Read More

Guru Purnima at Ameerpet, Hyderabad
Guru Purnima was celebrated on 12 July 2014 by Vivekananda Kendra Hyderabad at its Ameerpet Center. : Read More

Inauguration of Arun Jyoti Medical Van
The inaugural function of the medical van donated by IDRF to Vivekananda Kendra,Arun Jyoti was organized at Rangfraa Mandir, New Chingsa, Kharsang, Arunachal Pradesh : Read More

Priest felicitated to mark guru purnima
Vivekananda Kendra Arunjyoti ,Itanagar celebrated Guru Purnima on 20/07/2014 at Central Nyedar Namlo,Doimukh : Read More

युवा प्रेरणा शिविर - पटना
विवेकानन्द केंद्र कन्याकुमारी ,शाखा पटना द्वारा दिनांक 29.6.2014  को अभियंता भवन बोरिंग रोड में युवा प्रेरणा शिविर का आयोजन किया गया : विस्तृत

पटना में गुरुपूर्णिमा का उत्सव
विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी शाखा पटना ने 12.7.2014 को गुरु पूर्णिमा उत्सव कमला नेहरु शिशु विहार( कार्यालय से 800 मीटर दूर ) में  हर्षोल्लास के साथ मनाया गया : विस्तृत

धार में गुरुपूर्णिमा कार्यक्रम
१७ जुलाई विवेकानंद केंद्र धार में गुरुपूर्णिमा उत्सव सम्पन हुँआ : विस्तृत

VKRDP Monthly Report June 2014 : Read Online

Highlights from Mysore : Read More


Upcoming Events :

Computer Teachers camp at Portblair : View Event Detail

Spiritual Retreat at Kanyakumari : View Event Detail

યોગ શિક્ષા શિબિર : રાજકોટ, ગુજરાત : વધુ વિગત


New Sites & Blogs :

Vivekananda Kendra Vedic Vision Foundation : http://blog.vkvvf.org

Vivekanadna Kendra Rural Development Program : http://www.vkrdp.org

વિવેકસુધા : Viveksudha : A quarterly gujarati mag from Vivekananda Kendra, Kanyakumari : Blog Launched

Daily Katha is online at : http://katha.vkendra.org


Kind Attention

We are happy to inform that the "Daily Katha" is successfully ported on Google Group, in which you can select to receive All email, Abridged version, Digest version or no email option. From 1st August  "Daily Katha" will be sent by Google Group only, we will add all the existing recipients of the current group.

If any of your friend or family want to receive they can simply send email to daily-katha+subscribe@googlegroups.com they will receive first email for email verification & once confirm, second email for group joining confirmation within a minute.

If you face any difficulty in join please drop a email to katha@vkendra.org with your contact detail, alternatively feel free to call Sri Hardik at 076396-70994 for quick help.


--
विवेक विजाणु पंडित गण (Vivek WebMaster Team)
विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी (Vivekananda Kendra Kanyakumari)
Vivekananda Rock Memorial & Vivekananda Kendra : http://www.vivekanandakendra.org
Read n Get Articles, Magazines, Books @ http://prakashan.vivekanandakendra.org
Landline : Himachal:+91-(0)177-2835-995, Kanyakumari:+91-(0)4652-247-012
Mobile : Kanyakumari:+91-76396-70994, Himachal:+91-94180-36995
Let's work on "Swamiji's Vision - Eknathji's Mission"

Follow Vivekananda Kendra on   blog   twitter   g+   facebook   rss   delicious   youtube   Donate Online

मुक्तसंग्ङोऽनहंवादी धृत्युत्साहसमन्वित:।
सिद्ध‌‌यसिद्धयोर्निर्विकार: कर्ता सात्त्विक उच्यते ॥१८.२६॥

Freed from attachment, non-egoistic, endowed with courage and enthusiasm and unperturbed by success or failure, the worker is known as a pure (Sattvika) one. Four outstanding and essential qualities of a worker. - Bhagwad Gita : XVIII-26

सच्ची स्वतन्त्रता


            वह सम्पूर्णतः स्वतन्त्र अवस्था, जहाँ कोई बन्धन नहीं, कोई परिवर्तन नहीं, प्रकृति नहीं, कुछ ऐसा भी नहीं जो उसमें कोई परिणाम उत्पन्न कर सके - वेदान्त के ईश्वर-सम्बन्धी इन धारणाओं की जड में पूर्ण स्वतंत्रता से उत्पन्न आनन्द विचारशक्ति के धर्म की यह धारणा सर्वोच्च है। यह स्वातन्त्र्य तुम्हारे भीतर है, मेरे भीतर है और यही एकमात्र यथार्थ स्वातन्त्र्य है।

 

            विश्व का स्पन्दन स्वतन्त्रता का ही प्रकाश है। सब के ह्रदय में यदि एकत्व होता, तो हम विविधता को समझ ही नहीं सकते थे। उपनिषद् में ईश्वर की धारणा इसी प्रकार की है। कभी-कभी यह धारणा और भी सूक्ष्म हो जाती है और हमारे सामने एक ऐसे आदर्श की स्थापना करती है, जिससे पहले-पहल तो हमें स्तम्भित हो जाना पडता है। वह आदर्श यह है कि स्वरूपतः हम ईश्वर से अभिन्न हैं।

                                                              (II, २९८)

 

                            हिन्दुत्व अद्वितीय है कि यह आकांक्षियों से सलाह लेता है कि वे धार्मिक आदर्शों को अपनायें और सत्य को प्राप्त करें। केवल वही व्यक्ति वास्तविक मुक्ति का आनन्द उठा सकता है जो प्रकृति के दोहरेपन से बाहर निकल कर अपने मन को विस्तृत बना लेता है। इसीलिए स्वामीजी प्रश्न करते हैं:

 

            "मृत्यु क्या है? आतंक क्या है? उन सब में क्या तुम्हें प्रभु का आनन दिखायी नहीं देता? दुःख, कष्ट और आतंक से दूर भागकर देखो-वे तुम्हारा पीछा करेंगे। उनके सामने खडे हो जाओ, वे भाग जायेंगे। सारा संसार सुख और आराम का उपासक है; जो कष्ट प्रद है, उसकी उपासना करने का साहस बहुत कम लोग करते हैं। इन दोनों का अतिक्रमण ही मुक्ति है।"

 

            यह मुक्ति अथवा स्वतंत्रता ही वह लक्ष्य था जिसे स्वामीजी ने कर्म, भक्ति और ज्ञान योग के मार्ग से अधिक महत्व दिया। कर्म दूसरों को प्रेम करने और उनकी सेवा करने का सतत प्रयास होना चाहिए, भक्ति से प्रार्थना करना, चिन्तन करना, ईश्वर का गौरव-गान करना और उसकी सर्वव्यापकता को समझना, और ज्ञान, चिन्तन के माध्यम से उस सर्वोपरि के एकत्व के विचार द्वारा सुख प्रदान करता है।


--
कथा : विवेकानन्द केन्द्र { Katha : Vivekananda Kendra }
Vivekananda Rock Memorial & Vivekananda Kendra : http://www.vivekanandakendra.org
Read n Get Articles, Magazines, Books @ http://prakashan.vivekanandakendra.org

Let's work on "Swamiji's Vision - Eknathji's Mission"

Follow Vivekananda Kendra on   blog   twitter   g+   facebook   rss   delicious   youtube   Donate Online

मुक्तसंग्ङोऽनहंवादी धृत्युत्साहसमन्वित:।
सिद्ध‌‌यसिद्धयोर्निर्विकार: कर्ता सात्त्विक उच्यते ॥१८.२६॥

Freed from attachment, non-egoistic, endowed with courage and enthusiasm and unperturbed by success or failure, the worker is known as a pure (Sattvika) one. Four outstanding and essential qualities of a worker. - Bhagwad Gita : XVIII-26