Thursday, 4 January 2018

निवेदिता - एक समर्पित जीवन - 12

यतो धर्म: ततो जय:

 सेवा में तत्पर

भगिनी निवेदिता के निवास स्थान पर प्रति रविवार को आयोजित 'रविवारीय जलपान' (भेंट-वार्ता) का तत्कालीन समाज में अत्यन्त महत्व था। अध्यापक, शिल्पी,कलाकार,राजीनीतिक नेता,मठ के नवीन संन्यासी, वैज्ञानिक,क्रन्तिकारी पत्रकार एवं साहित्यकार मानो सभी का प्रेरणा केन्द्र था।
       ऐसी ही भेंट वार्ता में अरविन्द घोष के छोटे भाई वीरेंद्र घोष को देखकर भगिनी ने पूछा - "तुम्हारा लक्ष्य महान है, परन्तु क्या तुम अपनी मातृभूमि की सेवा में प्राणोत्सर्ग करने को प्रस्तुत हो ?" साहसी तरुण का गर्वीला उतर था, - 'हाँ ! प्रस्तुत हूँ। केवल एक शर्त है कि आप 'जोन ऑफ़ आर्क' बानी रहे। आप हमारा पथ प्रदर्शन करें। हमें आपकी आवश्यकता है, हम साथ काम करेंगे चाहे आप कलकत्ते में रहें तथा मैं बंगाल के ग्रामों में.............. !
        'यदि अभी भी तुम अकेलापन अनुभव करते हो तो मैं तुम्हारी सहायता करुँगी। इसीलिए मैं यहाँ पर हूँ......... !' - आत्मविश्वास भरा उतर था भगिनी का।


To Be continue



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हमें कर्म की प्रतिष्ठा बढ़ानी होंगी। कर्म देवो भव: यह आज हमारा जीवन-सूत्र बनना चाहिए। - भगिनी निवेदिता {पथ और पाथेय : पृ. क्र.१९ }
Sister Nivedita 150th Birth Anniversary : http://www.sisternivedita.org
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