Saturday, 20 August 2016

स्वतंत्रता दिवस भाषण -3

स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का मूल पाठ

मेरे प्यारे देशवासियों,

भाइयों-बहनों एक अभियान के संदर्भ में मैंने यही से चर्चा की थी। 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' हम कोई काम टुकड़ों में नहीं करते हैं। हमारा एक integrated approach होता है और 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' में हमने जो initiative लिए हैं, उसमें अभी भी मुझे समाज के सहयोग की आवश्यकता है। एक-एक मां-बाप को सजग होने की आवश्‍यकता है। हम बेटियों का सम्‍मान बढ़ाएं, बेटियों की सुरक्षा करें, सरकार की योजनाओं का लाभ लें। हमने सुकन्‍या समृद्धि योजना से करोड़ों परिवारों को जोड़ा है। जो बेटी बड़ी होगी तो उसकी गांरटी ले लेता है, हमने महिलाओं को लाभ हो, उस प्रकार की बीमा योजनाओं को सबसे ज्‍यादा बल दिया है। उसके कारण इनको फायदा होने वाला है। हमने इंद्रधनुष टीकाकरण की योजना, क्‍यों‍कि माताओं, बहनों को एक आर्थिक सशक्‍तीकरण, और एक health की भी सशक्‍तीकरण अगर यह दो काम कर लिए, शिक्षित कर लिया, आप मान कर चलिए घर में एक महिला भी अगर शिक्षित है, शारीरिक रूप से सशक्‍त है, आर्थिक रूप से स्‍वतंत्र हैं, एक महिला गरीब से गरीब परिवार को भी गरीबी से बाहर निकालने की ताकत रखती है। और इसलिए गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने में महिलाओं का सशक्‍तीकरण, महिलाओं का स्‍वास्‍थ्‍य, महिलाओं की आर्थिक सम्‍पन्‍नता, शारीरिक सम्‍पन्‍नता उस पर बल दे करके हम काम कर रहे हैं और इसलिए मेरे भाइयों-बहनों मुद्रा योजना, मुझे खुशी हुई मुद्रा योजना का लाभ साढ़े तीन करोड़ से ज्‍यादा परिवारों ने लिया और उसमें अधिकतम नये लोग थे, जो बैंक के दरवाजें पर पहुंचे। उसमें भी 80% करीब-करीब SC, ST, OBC के थेऔर उसमें भी बैंक में, मुद्रा बैंक में लोन लेने वाली 80% महिलाएं हैं। ये महिलाएं कैसे आर्थिक विकास में योगदान करेंगी। इसकी ओर आप ध्‍यान देते हैं।

भाइयों-बहनों पिछले हफ्ते हमने निर्णय किया, जो हमारी माताएं-बहनें आज विकास यात्रा में भागीदार बनी हैं, लेकिन प्रसूति के बाद उसको छुट्टी चाहिए। पहले वो छुट्टी कम मिलती थी। अब हमने ये छुट्टी 26 हफ्ते की कर दी है, ताकि मां अपने बेटे का लालन- पालन कर सके।

हमारे यहां बुनकर, Textile में काम करने वाले लोग, इनको, जो धागा बनाते हैं, धागे का लच्छा बनाते हैं। पहले उनको 100 रुपए मिलता था, हमने उसको 190 रुपए कर दिया ताकि मेरी वो मां, मेरी वो बहन, जो तार बनाने का काम करती हैं, उसको एक ताकत मिलेगी। जो सिल्क के काम में लगी हुई माताएं-बहनें हैं, जो बुनकर लगे हैं, उनके दाम में हमने 50 रुपये प्रति मीटर बढ़ा दिया और ये फैसला किया कि ये 50 रुपया व्यापारी को नहीं जाएगा, दलाल को नहीं जाएगा, बिचौलियों को नहीं जाएगा, जिस बुनकर ने उस सिल्क पर काम किया है, प्रति मीटर 50 रुपए सीधा उसके खाते में आधार के द्वारा जमा हो जाएंगे, मेरा बुनकर सशक्त बनेगा। उस दिशा में हमने ये योजनाएं है और उस योजनाओं का प्रभाव छोड़ रहा है।

मेरे प्यारे देशवासियों, जब रेल को देखते हैं, डाकघर को देखते हैं तो हमें भारत की एकता भी नजर आती है। हम जितना ज्यादा भारत को जोड़ने वाले प्रकल्पों को आगे बढ़ाएंगे, हमारी व्यवस्थाओं में बदलाव लाएंगे, देश की एकता को बल देगा।और इसलिए हमने किसानों के लिए मंडी e-NAM की योजना की है। आज किसान अपना माल online हिंदुस्तान की किसी भी मंडी में बेच सकता है। अब वो मजबूर नहीं होगा कि अपने खेत से 10 किलोमीटर की दूरी की मंडी पर मजबूरन माल देना पड़े, सस्ते में देना पड़े और उसकी मेहनत की कमाई न हो। अब देशभर में e-NAM के द्वारा एक ही प्रकार की मंडी का Network खड़ा हो रहा है।

GST के द्वारा Taxation का एक प्रकार से एक समानता का, समान व्यवस्था का परिणाम आने वाला है। जो भारत जोड़ने का भी एक काम करेगा।

हमने बिजली में, आपको हैरानी होगी, एक इलाके में बिजली रहती थी कोई लेना वाला नहीं था और दूसरा इलाका बिजली के लिए तड़पता था, अंधेरे में जीता था, कारखाने बंद हो जाते थे और उसको बदलाव लाने के लिए One Nation - One Grid - One Price उसमें हमने सफलता पाई है और बहुत तेजी से जो कभी गर्मी में 10 रुपया यूनिट का दाम देना पड़ता था। मैं पिछले दिनों तेलंगाना गया था, उस दिन 1 रुपया 10 पैसे दाम था जो कभी 10 रुपया हुआ करता था ये One Price का परिणाम देश को जोड़ने के लिए काम होता है।

हमारे देश का मजदूर एक जगह पर काम करता है, एक-दो साल के बाद नौकरी बदलता है, EPF में उसका पैसा कटता है लेकिन पैसा Transfer नहीं होता था और आपको हैरानी होगी, जब मैं सरकार में आया मेरे देश के मजदूरों को 27 हजार करोड़ रुपया EPF में पड़े थे कोई गरी‍ब - मजदूर लेने वाला नहीं था क्योंकि उसको इसकी पद्धति नहीं थी।

हमने इस समस्या का समाधान करने के लिए एक Universal Account Number दिया हमारे मजदूरों को और उसके कारण अब उसके पैसे वो जहां जाएगा EPF का fund transfer होगा। मजदूर जब retire होगा तो उसके रुपए उसके हाथ जाएंगे, किसी सरकारी खजाने में सड़ते नहीं पड़े रहेंगे, उस काम को हमने किया है।

चाहे भारतमाला हो, चाहे सेतूभारतम हो, चाहे Bharat Net हो ऐसे अनेक प्रकल्पों को हमने बल दिया है। इन सारे प्रकल्पों का हमारा उल्लेख भारत को जोड़ने की दिशा में भी हो, भारत के आर्थिक विकास की दिशा में भी हो, उस दिशा में काम कर रहे हैं।

भाइयों-बहनों ये वर्ष अनेक प्रकार के महत्व का है। देश दक्षिण के संत श्रीमान रामानुजाचार्य जी की 1000वीं जयंती मना रहा है, देश महात्मा गांधी के गुरू श्रीमद राजचंद्र जी जिनकी 150वीं जयंती मना रहा है, देश गुरू गोबिंद सिंह जी के 350वीं साल की जयंती मना रहा है, देश पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की शताब्दी का वर्ष मना रहा है। आज जब मैं रामानुजाचार्य जी को याद करता हूं तो एक बात मैं कहना चाहता हूं, हजार साल पहले, आज जब सामाजिक तनाव देखते हैं तो रामानुजाचार्य जी संत पुरुष, उन्होंने देश को क्या संदेश दिया था। रामानुजाचार्य जी कहते थे भगवान के सभी भक्‍तों को,भेदभाव और ऊंच-नीच का ख्‍याल किए बिना सेवा करो। उम्र-जाति के कारणों की वजह से किसी का भी अनादर मत करो, हर किसी का सम्‍मान करो। जो बात गांधी ने कही, जो बात अम्‍बेडकर ने कही, जो बात रामानुजाचार्य ने कही, जो भगवान बुद्ध ने कही, जो हमारे शास्‍त्रों ने कही, जो हमारे सभी आचार्य-महंतों, गुरूओं ने शिक्षको, ने कही वो है हमारी सामाजिक एकता की। समाज अगर टूटता है, साम्राज्‍य बिखर, ऊंच-नीच में बंट जाता है, स्‍पृश-अस्‍पृश में बंट जाता है तो भाइयो-बहनों वो समाज कभी टिक नहीं सकता है। बुराइयां हैं, सदियों पुरानी बुराइयां हैं, लेकिन बुराइयां अगर पुरानी हैं तो उपचार भी जरा ज्‍यादा कठोरता से करने पड़ेंगे, ज्‍यादा संवेदनशीलता से करने पड़ेंगे। होती है, चलती है, से सामाजिक समस्‍याओं का समाधान नहीं हो पाएगा, और ये दायित्‍व सवा सौ करोड़ देशवासियों का है। सरकारों ने समाज ने मिल करके समाज में जो टकराव की स्थितियां पैदा होती हैं, उसमें से हमें निकलना होगा।

और भाइयों-बहनों हम सबको, हम सबको सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ना होगा। हमने सबने अपने व्‍यवहार से सामाजिक बुराइयों से ऊपर उठना होगा, हर नागरिक को उठना पड़ेगा, और तभी जा करके हमसशक्‍त हिन्‍दुस्‍तान बना सकते हैं। सशक्‍त हिन्‍दुस्‍तान, सशक्‍त समाज के बिना नहीं बन सकता है। सिर्फ आर्थिक प्रगति सशक्‍त हिन्‍दुस्‍तान की गारंटी नहीं है, सशक्‍त समाज, सशक्‍त हिन्‍दुस्‍तान की गारंटी है और सशक्‍त समाज बनता है सामाजिक न्‍याय के अधिष्‍ठान पर। सामाजिक न्‍याय के अधिष्‍ठान पर ही सशक्‍त समाज निर्माण होता है और इसलिए हमारा सबका दायित्‍व है कि सामाजिक न्‍याय पर हम बल दें। दलित हो, पीड़ित हो, शोषित हो, वंचित हो, मेरे आदिवासी भाई हों, ग्रामवासी हों या शहरवासी हो, पढ़ा-लिखा हो या अनपढ़ हो, छोटा हो या बड़ा हो, सवा सौ करोड़ देशवासी हमारा परिवार है, हम सबने मिलकर के देश को आगे बढ़ाना है और उसी दिशा में हमें काम करना होगा।........

...........मैं फिर एक बार महापुरूषों को नमन करते हुए जल, थल, नभ में हमारी रक्षा के लिए जान की बाजी लगानेवाले, हमारे पुलिस के नौजवान, 33 हजार शहादतों को नमन करते हुए, मैं देश के भविष्य की ओर सपनों को देखते हुए, अपनेआप को समर्पित करते हुए आज लाल किले की प्राचीर से आप सबको पूरी ताकत के साथ मेरे साथ बोलने के लिए कह रहा हूं भारत माता की जय..

आवाज दुनिया के हर कोने में जानी चाहिए –

भारत माता की जय, भारत की जय।

वंदे मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम।

जय हिंद, जय हिंद, जय हिंद।