Tuesday, 26 January 2016

Bharat Mata

Any organization in India should have basic thinking of making Bharat Mata Jagadguru as that of the Rashtriya Swayamsevak Sangh though the methodology to attain could be different. How has Sangh looked into it? What are the things which it considers most important? In the words of Param Poojaneeya Sri Guruji :

1. यह सुनिश्चित है कि किसी भी प्रकार की प्रतिकूल परिस्थिति में साहस के साथ अपना मार्ग निकालते हुए, सब प्रकार के संकटों को कुचलते हुए तथा उनकी परवाह न करते हुए, संघ अपने विशिष्ट मार्ग से निरन्तर प्रगतिपथ पर अग्रसर रहेगा। हम पर जितने आघात होंगे उतनी ही अधिक शक्ति से रबर की गेंद के समान उछल कर ऊपर ही उठेंगे। हमारी शक्ति अबाधित रूप से बढ़ती ही जायेगी और एक दिन वह सारे राष्ट्र में व्याप्त हो जायेगी।

2. स्वराज्य-प्राप्ति एक घटना है, क्रिया है। स्वतंत्र समाज-जीवन सुरक्षित और संपन्न रखना चिरंतन महत्त्व का प्रश्न है। उसके लिये राष्ट्र सदैव सिद्ध रहना चाहिए। वह सिद्धता रहने के लिये राष्ट्र-जीवन में से हानिकारक अवगुण मिटाकर सुसूत्र, सामर्थ्यशाली समाज-जीवन निर्माण करने की दृष्टि से अपना कार्य खड़ा किया गया है। हिंदू-राष्ट्र-जीवन की कल्पना निर्भयपूर्वक सामने रखकर उसकी गौरववृद्धि के लिये सारा समाज एकसूत्र में संगठित करने का कार्य अपने सामने है। इसलिये संघ के नाम सहित प्रत्येक बात का सूक्ष्मता से विचार कर कार्य की रचना की गई है।

3. समष्टि-जीवन की भावना के आधार पर निर्मित संगठन से उत्पन्न सामर्थ्य के भाव या अभाव में ही स्वतन्त्रता का भाव या अभाव होता है। जिस परिश्रम से स्वतन्त्रता प्राप्त की जाती है उसकी रक्षा के लिये उससे अधिक परिश्रम की आवश्यकता है। इतना ही नहीं, तो राष्ट्र का गौरव, मान, सम्मान और वैभव भी उस समाज के संगठन पर ही निर्भर है। इस कार्य में परिस्थिति के कारण परिवर्तन की आवश्यकता नहीं होती। इसीलिये उन्होंने संघकार्य को परिस्थिति-निरपेक्ष कहा। यह कार्य परिस्थिति की प्रतिक्रिया से उत्पन्न नहीं हुआ, अपितु इसका आधार भावात्मक है। अपने समाज को सुसंगठित करने के लिये, राश्ट्र के प्रवाह को अखंड बनाये रखने के लिये ही इस कार्य का निर्माण हुआ है।

Happy Republic Day