Wednesday, 10 June 2015

Be perfectionist

|| योग: कर्मसु कौशलम् ||


Mananeeya Eknathji says Systematic bent of Mind must reflect in every sphere of activity which alone will bring perfection in the work that is undertaken. He further says:
We notice that there is order in all activities of human beings; physical or mental, external or internal. This orderliness, because it adds a new dimension of perfection and grace, creates a love for orderliness and it results in discipline. This discipline pervades the external world and also human activities. It so happens sometimes, persons are systematic in a particular activity only and undisciplined in the rest of their behaviour. It is not an all-round feature of their personality. This is not praiseworthy. The orderliness or the systematic bent of mind, must reflect in every sphere of activity and must become an all-pervading facet of one's personality.
Mananeeya Prime Minister Sri Narendrabhai while inaugurating the Mananeeya Eknathji Janma Shati Parva said :

एक बार गुजरात में आरएसएस का शिविर लगा था, वो आए थे। तो एक परिवार में हमने उनका ठहरने का प्रबंध किया था। उस परिवार में वो set ही नहीं हो पाए। डिस्टेर्ब रहते थे। तीन दिन रुकना था और कमरे में जब जाते थे, तो भी उनकी नजर वहां जाती थी, बाहर निकलते थे तो भी वहीं जाती थी। मैं पहले दो दिन नहीं मिल पाया। तीसरे दिन उनके पास गया। मैंने कहा कि एकनाथजी कैसा रहा, कोई कठिनाई तो नहीं हुर्इ ? क्योंकि हम बड़े शिविर में लगे थे और रात को वहां रूकते थे और फिर शिविर में आते थे। वे बोले ये जो ट्यूब लाइट हैं न, ये टेढ़ी लगती है। वो जब तक घर में थे उस परिवार के पास, जब तक उस ट्यूब लाईट को ठीक नहीं करवाया, वह चैन से नहीं बैठे।

मुझे बराबर स्मरण है कि परम पूज्य गुरूजी का स्वर्गवास हुआ। रात को नौ बजकर, पांच मिनट पर परम पूज्यनीय गुरूजी ने अपना देह छोड़ा। बाद में मीडिया को सूचना करनी थी। अब समय बदल चुका है। अब रात को 11 बजे खबर दो, तो भी पहुंच जाती है, टेक्नोथलॉजी इतनी बढ़ी हुई है। उस समय नौ बजे थे तो, यह आवश्यक था, जल्दी से जल्दी मीडिया को जानकारी दी जाए। आगे का प्रश्न कि अंत्येष्टि कब होगी, इसकी सूचना देनी थी। एकनाथजी वहां मौजूद थे, गुरूजी ने देह छोड़ा। एकनाथजी को कहा गया आप ड्राफ्ट बनाइए। अब आप कल्पना कर सकते हैं, गुरूजी के प्रति एकनाथजी की श्रद्धा, उनका समर्पण भाव, समय की पाबंदी, दुनिया को बताना है कि ऐसा हुआ है। अब ड्राफ्ट बनाने के लिए बैठे। समय की पाबंदी। उस समय कम्यूटर तो था नहीं। टाइप करें, तो वो भी बात बनती नहीं थी। उनके अक्षर बहुत छोटे होते थे। उनकी हैंडराइटिंग बहुत अच्छी थी। तीन-चार लाइन लिखते थे, उनको अच्छा नहीं लगता था तो कागज फेंक देते थे। पांच सात लाइन पर पहुंचते थे, फिर अच्छा नहीं लगता था। करीब आठ दस कागज Perfection नहीं आने के कारण, और उधर सब परेशान थे, कि मीडिया में देरी हो रही है। जल्दी कीजिए। खैर, एकनाथजी का Perfection का नेचर इतना हावी था कि वो नहीं कर पाए और मुझे याद है कि आबाजी थत्ते ने उनसे वह छीन लिया और कहा कि आपने जो किया है वह Perfect है और मैं इसे भेजता हूं और उन्होंने भेज दिया। और उनका यह जो कहीं पर भी एक शब्द इधर से उधर न हो जाए, यह उनकी विशेषता रही।

डायरी लिखने की उनकी अजब पद्धति थी। जैसे हम डायरी लिखते हैं वैसे वह नहीं लिखते थे। बहुत की अलग तरीका था। मिलनेवाले व्यक्ति, उनसे हुई बातचीत और उसमें से काम न आने वाली अपने जीवन में उपयोगी बात, उसको वे छांटते थे, उसे अपनी डायरी में एक कोने में लिखते थे। मुझे नहीं लगता कि उन्होंने अपनी डायरी कभी छोड़ी हो।