Thursday, 1 January 2015

Fwd: कल्पतरु दिवस

Aadarneeya Shital Didi se....

कल्पतरु दिवस

1886 में अपनी महासमाधि से कुछ ही माह पूर्व स्वामी विवेकानन्द के गुरु श्रीरामकृष्ण परमहंस ने 1 जनवरी की शाम अपने शिष्यों को बड़ा ही अद्भूत प्रसाद प्रदान किया । काशिपुर उद्यान की घटना है । ठाकुर को गले का कर्करोग (Cancer) था। विश्राम के लिये काशिपुर उद्यान में वास्तव्य था पर भक्तगण तो रहते ही थे। शाम के समय जब कीर्तनानन्द में सब निमग्न थे तब ठाकुर समाधि से उठकर प्रांगण में गये। गिरीश घोष उनके साथ थे। उन्होंने गिरीश से पूछा, '' तुम मुझे क्या मानते हो?'' वैसे ये प्रश्न वे गिरीश से कई बार कर चुके थे। गिरीशबाबू ने पूरी श्रद्धा से उत्तर दिया, ''हम सब आपको ईश्वर का अवतार मानते है ।'' किसी बालक की भाँति श्री रामकुष्णदेव प्रसन्न हुए । ''अब मै और क्या कहू?'' ऐसा कुछ कहते हूए समाधिमग्न हो गये । समाधि से बाहर आते ही उन्होने सब शिष्यों पर अपनी कृपावृष्टि प्रारम्भ की  किसी को गले लगाकर, किसी को केवल दृष्टिक्षेप से उन्होने उपकृत किय। वह अलौकिक आशिर्वाद था। उस दिन उस समय जो भी वहाँ उपस्थित थे उन्न्होंने अपने अन्दर अलौकिक आध्यात्मिक शक्ति का संचार अनुभव किया । उनके शिष्य बताते है वर्षों से जिस जिस लक्ष्य को लेकर वे साधना कर रहे थे । ठाकुर के आशिर्वाद से वे उस दिन साक्षात हो गये । जो माँ के दर्शन करना चाहता था उसे वह मिल गया । जो मन शांति चाहता था उसे वह मिल गया। जो भक्ति चाहता था उसे अविचल भक्ति का प्रसाद मिला। कोई निराकार को अनुभव करना चाहता था। उसकी वह ईच्छा पूर्ण हुई। ठाकुर स्वयं साक्षात् कल्पतरु बन गये 
कल्पतरु अथवा कल्पवृक्ष एक ऐसा वृक्ष है जिसके नीचे बैठकर जो भी ईच्छा की जाये वह पूर्ण होती है । ऐसी ही शक्ति कामधेनु में भी मानी गई है । इसीलिये भारत में गाय का बड़ा महत्व है । गोमाता की सेवा में भी मन, बुद्धि शरीर का मैल धोने की क्षमता है । गाय के सान्निध्य में कोई विकार नहीं टिकता । कामधेनु, कल्पतरू, यह सामाजिक साधना के ही नाम है ।

हमारे महापुरूष अपने तप से हम पर कुपादृष्टि का वरदान देकर हमारी इस त्याग तप के जीवन में श्रद्धा को दृढ़ करते है । 16 अगस्त 1886 को शरीर छोडने से पूर्व 1 जनवरी को ठाकुर ने अपने शिष्यों पर ऐसी ही कृपा की, ताकि हम इस तप के पथ पर सदा दृढ़ता से अग्रेसर होते रहें ।
अपने व्रत को सम्बल प्रदान करने हम सब 1 जनवरी को कल्पतरु दिवस मनाते है । उस दिन शाम को भजन करते है । श्रीरामकृष्ण की जीवनी, लीलीप्रसंग अथवा भक्तमालिका में से इस प्रसंग का पठन करते है । ठाकुर के समक्ष अपनी उदात्त इच्छा, जीवन के आध्यात्मिक, सामाजिक अथवा राष्ट्रीय ध्येय को प्रगट करते है ।


Jai Sri Gurumaharaj Ki Jai ...........



             शीतल
   मध्य प्रान्त संगठक
विवेकानंद केंद्र - भोपाल
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